बाघी नैन !

जज़्बात जो ज़ुबान पर आ रुकी थीं..

बाघी नैनों ने देखो कैसे व्यक्त कर दिया..

हम सोचते ही रह गए खड़े खड़े..

हाल-ए-दिल जाने कब बयान हो गया..

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जाने क्यों…

कहते हैं कि बुराई का मापदंड भी अच्छाई ही तय करती है..
समझ नहीं आता हे नारी फिर तुझे ये कैसी उपाधि दी जाती है..
तुझसे जुड़ी तो हर बात यहाँ कमज़ोरी की निशानी मानी जाती है..
जाने फिर भी हर भाषा के अव्वल व्यंग्य में तुझे ही क्यों सलामी दी जाती है..

सपने..

सपनों को कहाँ पता है होता..
कि वो पूरे होंगे भी या नहीं..
पलते तो हैं सबकी आँखों में..
पर साकार होते हैं सिर्फ कहीं..

किसी के जीने का सहारा हैं बनते..
तो किसी को चैन से मरने भी नहीं देते..
जहाँ लिया जन्म और जहाँ हैं पनपते..
उन नैनों को भी ये चैन से सोने नहीं देते..

मेहनत की गलियों से हैं रोज़ घुमाते..
रात भर हैं ख्वाबों की सैर कराते..
कुछ खुशियों का बलिदान तो हैं माँगते..
बदले में सफ़लता की सीढ़ी भी हैं चढ़ाते..

मेहनत के आँगन में ही हैं खिलते इसके फूल..
उनके नहीं जो थक जाए खाकर एक ही बार धूल..
इस मँत्र को गलती से भी न जाने देना भूल..
क्योंकि यही तो है सारी बातों का एक ही मूल..

हारना नहीं हो परिस्थिति चाहे कितनी भी अनुकूल..
असफलता को कभी न बनने देना अपने रास्ते का शूल..
कयोंकि काँटों की सेज़ पर ही तो है वो हमेशा सजता..
जो कहलाए राजा वो गुलाब और सबके बालों पर है फबता..

मुश्किलें चाहे जितनी भी अंगड़ाइयाँ लेती रहें..
मंजिल को और मीठा बना रहे भले वो ये कहें ना कहें..
सोचो तो सोना भी तो जितना आग में तपता है..
अंत में वो उतना ही खरा और बन जाता है..

मेहनत की मोतियों से पिरो रही हूँ मैं भी सपने..
गिरते तो हैं पर उठा लेती हूँ हैं तो वो अपने..
अब खोल दिए वो दरवाजे़ जिसपे मैंने कभी लगाया था ताला..
शायद एक दिन गूथ ही लूँ अपने सपनों का माला..

हार से न जाने कयों अब डर सा नहीं लगता..
शायद बहुत सारी पहन ली हैं मैंने..
जो पहले कहती थी इसका भार सहा नहीं जाता..
आज कहती है इससे भी है जीत सा खुशी मिलता..

बढ़ाए हैं फिर से कदम मैंने कुछ सपनों की ओर..
अब ना चलने दूँगी इस पर किसी और का जो़र..
विश्वास है एक दिन ज़रूर होगी मेरी इन रातों की भोर..
करती रहूँगी मेहनत तब तक चाहे टूट जाए इन साँसों की डोर..

-PV

हौसला

आसमानों को छूती हो फिर भी मेरे अंगने में बनाती हो अपना एक घोंसला..
हम भी तेरे अंबर में छोटा सा घर बना लेते जो होता नन्ही गौरैया तुझसा हौसला..

-PV

What the lips can't express…